शोधकर्ता कहते हैं कि ज्यादातर क्रिप्टो-निवेशक इसे सट्टेबाजी के रूप में ही देख रहे थे. उन्होंने कहा युवा निवेशक उन महीनों में ज्यादा सक्रिय थे, जिससे पिछले महीने में कीमत बढ़ी हो. यानी जब-जब बिटकॉइन की कीमत बढ़ती, उसके अगले महीने निवेश करने वाले युवा बढ़ जाते. शोधकर्ताओं ने निवेशकों के इस व्यवहार को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा किए जाने की जरूरत है.

बिटकॉइन के 75 प्रतिशत निवेशकों को नुकसान हुआः रिपोर्ट

बिटकॉइन में निवेश करने वाले लगभग 75 प्रतिशत लोगों को नुकसान उठाना पड़ा है. एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने 95 देशों में सात साल में हुए निवेश के बाद यह नतीजा निकाला है.

क्रिप्टोकरंसी 'बिटकॉइन' में निवेश करने वाले हर चार में तीन लोगों ने घाटा उठाया है. सोमवार को प्रकाशित हुए एक नए अध्ययन में 2015 से 2022 के बीच 95 देशों में बिटकॉइन निवेशकों से बातचीत के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है.

पिछले कुछ समय में एक के बाद कितने बिटकॉइन हैं एक कई बड़ी क्रिप्टोकरंसी और उनसे जुड़ीं कंपनियां मुंह के बल गिरी हैं जिसके बाद क्रिप्टो-निवेशकों में हड़कंप मचा हुआ है. हाल ही में एफटीएक्स नामक क्रिप्टो कंपनी के दीवालिया हो जाने से इस निवेश क्षेत्र में लोगों के भरोसे की चूलें हिल गई हैं.

बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स, जिसे दुनिया के केंद्रीय बैंक का केंद्रीय बैंक भी कहा जाता है, कहता है कि बीते सात साल में बिटकॉइन के निवेशकों ने भारी नुकसान झेला है. अपने अध्ययन में उसने कहा, "कुल मिलाकर देखा जाए तो बिटकॉइन के तीन चौथाई निवेशकों ने अपना धन खोया है.”

युवाओं में ज्यादा रुझान

इस अध्ययन का एक निष्कर्ष यह भी है कि स्मार्टफोन ऐप के जरिए निवेश ने बड़ी संख्या में लोगों को इस मुद्रा में धन लगाने के लिए आकर्षित किया. 2015 में स्मार्टफोन से निवेश करने वालों की संख्या 1,19,000 थी जो 2022 में बढ़कर 3.25 करोड़ पर पहुंच गई.

इस बारे में शोधकर्ताओं ने लिखा, "हमारा विश्लेषण दिखाता है कि दुनियाभर में बिटकॉइन की कीमत का संबंध छोटे निवेशकों के इसमें निवेश से है.” साथ ही उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कीमत बढ़ती जा रही थी और छोटे निवेशक बिटकॉइन खरीद रहे थे, "सबसे बड़े निवेशक इसे बेच रहे थे और छोटे निवेशकों के दम पर मुनाफा कमा रहे थे.”

शोधकर्ताओं के पास हर निवेशक के नफे-नुकसान के आंकड़े तो नहीं थे लेकिन वे नए निवेशकों द्वारा खासतौर पर स्मार्टफोन ऐप से निवेश करने से लेकर पिछले महीने तक के बिटकॉइन की कीमत का विश्लेषण कर इन नतीजों पर पहुंचे हैं. उन्होंने यह भी पाया कि क्रिप्टोकरंसी में निवेश करने वालों में सबसे बड़ी संख्या, लगभग 40 प्रतिशत लोग 35 वर्ष से कम आयु के पुरुष थे, जिसे आबादी का "सबसे ज्यादा जोखिम उठाने वाले” हिस्से के रूप में देखा जाता है.

भारत में भी बढ़े निवेशक

वैश्विक क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंज कूकॉइन द्वारा जारी किया गया डाटा बताता है कि भारत में "लंबी अवधि में मुनाफा पाने की" भावना से निवेश करने वाले ज्यादा हैं. भारत में 11.5 करोड़ क्रिप्टो निवेशक हैं, यानी 18 से 60 वर्ष की आयु वाले लोगों में लगभग 15 फीसदी ने क्रिप्टोकरंसी में निवेश किया है.

यह रिपोर्ट 18 से 60 वर्ष की आयु वर्ग के 2042 लोगों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण पर आधारित है. इन निवेशकों में 40 प्रतिशत से ज्यादा लोग 30 से कम आयु के हैं और मानते हैं कि भविष्य में क्रिप्टोकरंसी मुनाफे का सौदा साबित होगी. 54 प्रतिशत निवेशकों को कितने बिटकॉइन हैं कितने बिटकॉइन हैं उम्मीद है कि उन्हें मुनाफा होगा. 56 प्रतिशत मानते हैं कि क्रिप्टोकरंसी ही भविष्य की मुद्रा है.

Crypto Currency में निवेश कितना है सुरक्षित, Bitcoin और डिजिटल करेंसी को लेकर है कन्फ्यूजन तो जानिए.

Updated: February 3, 2022 10:31 AM IST

cryptocurrency bitcoin

Crypto Currency: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने इस साल का बजट (Budget 2022-23) पेश करते हुए बड़ा ऐलान किया था. वित्त मंत्री ने भारत में भी डिजिटल करेंसी को मान्यता देने की बात कही और कहा कि केवल भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी डिजिटल मुद्रा को मुद्रा के रूप में मान्यता दी जाएगी. इसके साथ उन्होंने ये भी कहा था कि सभी क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली आय पर 30 प्रतिशत का TAX लगेगा. यह म्युचुअल फंड या यहां तक ​​कि शेयरों से होने वाली आय पर आप जितना भुगतान करते हैं, उससे कहीं अधिक है.अब क्रिप्टो करेंसी (Cryptocurrency) में निवेश करने वाले लोगों के मन में इसे लेकर कई तरह के सवाल पैदा हो गए हैं.

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राजस्व सचिव तरुण बजाज ने कहा कि सरकार डिजिटल करेंसी को स्पेकुलेटिव असेट मानती है. यही कारण है कि अन्य स्पेकुलेटिव असेट जैसे हॉर्स रेसिंग की तरह ही क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर 30 प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा. साथ ही टोटल अमाउंट पर 1 प्रतिशत टीडीएस काटने का प्रावधान है.

इसके साथ ही राजस्व सचिव तरुण बजाज ने बड़ी बात कही है कि अगर क्रिप्टो करेंसी से किसी तरह का कोई नुकसान होता है तो भरपाई की कोई व्यवस्था नहीं है. उन्होंने साफ किया कि अगर किसी वित्त वर्ष में आपको क्रिप्टो में निवेश से घाटा होता है तो आप इसे कैरी फॉरवर्ड नहीं कर सकते.

वहीं, टीवी सोमनाथन ने कहा कि क्रिप्टो की वास्तविक वैल्यू कोई नहीं जानता. इनके रेट्स में बदलाव होते रहता है. सरकार की नई नीति है कि क्रिप्टो पर होने वाली कमाई पर अब 30 प्रतिशत टैक्स देना होगा.

Crypto Currency से होने वाली आय पर 30 प्रतिशत कर लगाया कितने बिटकॉइन हैं कितने बिटकॉइन हैं जाएगा. उदाहरण के लिए, यदि आप अपने बिटकॉइन बेचकर 100 रुपये कमाते हैं, तो आपको सरकार को क्रिप्टो टैक्स के रूप में 30 रुपये का भुगतान करना होगा. आपको केवल अपनी आय या क्रिप्टोकरेंसी से लाभ पर ही टैक्स का भुगतान करना होगा. उदाहरण के लिए, यदि आपने 5,000 रुपये की क्रिप्टोकरेंसी खरीदी है और बेचते हैं तो 5,500 रुपये में केवल 500 रुपये पर 30 प्रतिशत कर लगेगा, न कि पूरे निवेश पर.

मौजूदा आयकर कानून करदाताओं को लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ के खिलाफ अपने दीर्घकालिक नुकसान को समायोजित करने की अनुमति देते हैं. यह करदाताओं को उनके दीर्घकालिक लाभ पर कर का भुगतान करने से छूट देता है. हालाँकि, क्रिप्टो आय के मामले में यह संभव नहीं होगा.

भारत में अभी भी कोई क्रिप्टो कानून नहीं है. नया कराधान बस क्रिप्टो लेनदेन को वैधता देता है और सरकार को सभी लेनदेन की निगरानी करने की अनुमति देता है. इसे सरल शब्दों में समझें तो, यह भारत में क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी बनाता है. हालांकि, वे अभी भी अनियंत्रित हैं.

तो क्या क्रिप्टो करेंसी लीगल हो गई?

बजट में हुए इस ऐलान के बाद ज्यादातर लोगों के मन में ये सवाल है कि क्या सरकार ने डिजिटल कितने बिटकॉइन हैं करेंसी पर टैक्स लगा कर इसे लीगल कर दिया है? जवाब है- नहीं. इसे ऐसे समझिए, सरकार सिर्फ उस डिजिटल कितने बिटकॉइन हैं करेंसी (Digital Currency) को लीगल यानी वैध मानती है, जिसे Reserve Bank of India-RBI जारी करता है या करेगा. मतलब अभी जो Bitcoin जैसी Crypto Currency हैं, वो वैध नहीं है. बजट भाषण के बाद पत्रकारों से सवाल-जवाब में वित्तमंत्री ने साफ किया कि क्रिप्टो की वैधता को लेकर सरकार में चर्चा जारी है लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि सेंट्रल बैंक के फ्रेमवर्क के बाहर जो भी क्रिप्टोकरेंसी हैं, वे करेंसी नहीं हैं. अगर कोई आपसे कहे कि ये लीगल हो गई हैं तो जब तक सरकार नहीं कहती, मानिएगा नहीं. यहां पर गौर करने की बात ये भी है कि सरकार अप्रैल से शुरू होने वाले कारोबारी साल में अपनी डिजिटल करेंसी लाने की भी तैयारी में है जिसका जिक्र वित्तमंत्री ने अपने भाषण में किया. जाहिर है ये करेंसी पूरी तरह लीगल होगी.

वर्चुअल एसेट से वित्तमंत्री का मतलब क्या है?

आसान तरीके से समझें तो आप जो सोना खरीदते हैं या जो घर खरीदते हैं, वो आपकी Assets होती है. मतलब आपकी सम्पत्ति, ना कि ये करेंसी है. ठीक इसी तरह Crypto Currency भारत सरकार के लिए एक Asset होगी और इस पर लोगों से टैक्स वसूला जाएगा. अगर आप ये सोच रहे हैं कि Bitcoin, Ethereum, Tether, Ripple जैसी डिजिटल करेंसी को लीगल माना गया है तो तकनीकी तौर पर बिल्कुल सही नहीं है. हालांकि, लोग इसमें निवेश कर सकेंगे.

सरकार के प्रतिनिधियों ने ये भी बताया कि देश में क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन साल 2017 से ही सरकार के राडार पर है. इस पर टैक्स लगाने से सरकारी खजाने में मोटी रकम पहुंचनी तय है. अभी अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, Netherlands और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में वर्चुअल करेंसी (Virtual Currency) पर वहां की सरकारें टैक्स लगाती हैं. सरकार के इस फैसले के पीछे एक बड़ी वजह ये हो सकती है कि, हमारे देश में जितने लोगों ने CryptoCurrency में निवेश किया है, वो देश की आबादी का लगभग 8% हैं. RBI के आंकड़ों के मुताबिक, इन लोगों ने अपने 70 हजार करोड़ रुपए इस समय ऐसी Virtual Currency में लगाए हुए हैं. पूरी दुनिया में CryptoCurrency में ट्रेड करने के मामले में भारतीय सबसे आगे हैं. सरल शब्दों में कहें तो ये 30 प्रतिशत टैक्स, सीधे तौर पर 70 हजार करोड़ रुपए के निवेश को एक गारंटी देगा और हो सकता है कि भारत में इसका इस्तेमाल बढ़ जाए.

गिफ्ट पर भी लगेगा टैक्स, ऐसे होगा कैलकुलेट

बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने वर्चुअल एसेट्स (Virtual Assets) के ट्रांजैक्शन से हुई कमाई पर 30% टैक्स लगाने का प्रस्ताव किया. क्रिप्टोकरेंसी गिफ्ट करने को भी ट्रांजेक्शन माना जाएगा. मतलब अगर आप क्रिप्टोकरेंसी किसी को गिफ्ट में देते हैं तब भी 30 फीसदी टैक्स की देनदारी बनेगी. गिफ्ट किए जाने के मामले में उस समय की वैल्यू पर टैक्स लगेगा. इस वैल्यू को Recipient का इनकम माना जाएगा और उसे वैल्यू पर टैक्स देना होगा.

एक और बात जो नोटिस करने वाली है कि ये नया टैक्स आने वाले कारोबारी साल यानी 1 अप्रैल से लागू होगा. यानी क्रिप्टो में कारोबार करने वालों के पास फिलहाल 31 मार्च तक की मोहलत है. वित्त मंत्री ने यह भी प्रस्ताव किया कि डिजिटल एसेट्स के दायरे में क्रिप्टोकरेंसी के अलावा NFT समेत सारे टोकन आते हैं, जो सेंट्रल बैंक के फ्रेमवर्क में नहीं हैं. वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि रिजर्व बैंक की डिजिटल करेंसी आने आने वाली है. ये सारे बदलाव बजट पर कैबिनेट की मुहर लगने के बाद 1 अप्रैल 2022 से लागू हो जाएंगे.

क्‍या आपने भी खरीदा था 2010 में बिटकॉइन? जानिए कितना दे चुकी है रिटर्न

क्‍या आपने भी खरीदा था 2010 में बिटकॉइन? जानिए कितना दे चुकी है रिटर्न

बुधवार को क्रिप्‍टोकरेंसी मार्केट में रिकवरी देखने को मिल रही है। आज बिटक्‍वाइन की कीमत में 16 फीसदी का उछाल देखने को मिला है। ( Photo by REUTERS/Dado Ruvic/Illustration/File Photo )

बीते कुछ समय से बिटकॉइन फिर से फोकस में है। 16 अप्रैल से 21 जुलाई के बीच अपने चरम से करीब 53 फीसदी गिरने के बाद महज एक हफ्ते में इसकी कीमतों में 32 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दुनिया की सबसे बडी क्रिप्‍टोकरेंसी बिटकॉइन की कीमतें अत्यधिक अस्थिर रही हैं। 2009 में पहली बार लॉन्च होने के बाद से इसमें कई उतार-चढ़ाव आए हैं। बिट्कॉइन की लांचिंग से बने रहने वाले निवेशकों ने अब तक अविश्वसनीय लाभ प्राप्त किया है। उदाहरण के लिए, यदि आपने 2010 के मध्य में बिटकॉइन में निवेश किया था, तो आपका रिटर्न अरबों में हो सकता है, क्योंकि बिटकॉइन का शुरुआती मूल्‍य 0 डॉलर के करीब था।

Crypto Currency: क्रिप्टो करेंसी क्या है, इसे कहां से खरीदें?

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Crypto Currency पर ज्यादा रिटर्न मिलने के कारण स्कैम भी बढ़ गए है, ऐसे में निवेशकों को थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है

  • क्रिप्टो करेंसी नेटवर्क पर आधारित डिजिटल मुद्रा है, जिसका डिस्ट्रीब्यूशन कंप्यूटरों के एक विशाल नेटवर्क के माध्यम से किया जाता है.
  • कंप्यूटर नेटवर्क और ब्लॉकचेन पर आधारित यह विकेंद्रीकृत संरचना क्रिप्टो करेंसी को सरकारों और किसी भी वित्तीय नियंत्रण से बाहर रखती है.
  • क्रिप्टो करेंसी के बारे वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लॉकचेन पर आधारित इस तकनीक के कारण दुनिया भर में फाइनेंशियल और कितने बिटकॉइन हैं कानूनी पेचीदगियां पैदा होंगी.
  • क्रिप्टो करेंसी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह अन्य परंपरागत मुद्राओं के मुकाबले में बेहद सस्ता और तेज मनी ट्रांसफर है.
  • क्रिप्टो करेंसी का सिस्टम डिसेंट्रलाइज होने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसी एक जगह से इस मुद्रा पर नेगेटिव असर नहीं होगा.
  • क्रिप्टो करेंसी की कुछ मुश्किलें भी हैं, जिनमें कीमत में होने वाला उतार-चढ़ाव, माइनिंग के लिए ऊर्जा की ज्यादा खपत और इसका आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल है.
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