SEBI ने किए मार्जिन के नियमों में बदलाव

Kavita Singh Rathore

राज एक्सप्रेस। यदि आप शेयर बाजार में अपना पैसा लगाते है तो, हो सकता है, ये खबर आपके काम की हो। दरअसल, सिक्युरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) द्वारा मार्जिन के नियमों में बदलाव किया गया है। इन नियमों में हुए बदलावों को देखते हुए लगता है कि, शेयर बाजार को मार्जिन की मार झेलना पड़ सकती है।

मार्जिन में किया गया बदलाव :

बता दें, SEBI द्वारा मार्जिन के नियमों में किए सेबी के नए मार्जिन नियम गए बदलाव के बाद से कैश सेग्मेंट में भी अपफ्रंट मार्जिन लगेगा। साथ ही कैश सेग्मेंट में कम से कम 22% मार्जिन वसूला जाएगा। बताते चलें, यदि सेबी के नए मार्जिन नियम कोई भी ग्राहक इनका इस्तेमाल करना चाहेगा तो, वो T+2 सेटलमेंट के बाद ही इन पैसों को प्राप्त कर सकेगा। सरल शब्दों में समझे तो, शेयर सेबी के नए मार्जिन नियम बाजार से शेयर खरीदने वाला कोई भी यूजर आपने शेयर बेचने के 2 दिन बाद ही नए शेयर खरीद पाएंगे। इसका सीधा असर BTST या STBT के वॉल्यूम पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

होल्डिंग के शेयर पर मार्जिन :

वहीं, अब से यदि कोई यूजर होल्डिंग के शेयर बेचना चाहता हैं तो, उसे मार्जिन लगेगा। NSE, BSE द्वारा शनिवार को इस बारे में सम्पूर्ण जानकारी FAQ जारी जार साझा की गई। बता दें, मार्जिन से जुड़े लागू किए गए नए नियम 1 अगस्त से कई चरणों में लागू होने शुरू हो जाएंगे। इस मामले में जानकारों का भी कहना है कि, NSE-BSE को ब्रोकर्स, ट्रेडर्स की मुश्किलों के कारण को समझना चाहिए।

ब्रोकर्स के संगठन ने जताई चिंता :

गौरतलब है कि, इन नियमों में बदलाव पर ब्रोकर्स के संगठन ANMI ने चिंता जताई है। ब्रोकर्स के संगठन ने चिंता जताते हुए SEBI को बताया है कि, इन नए नियमों से ब्रोकर्स और ग्राहकों को सेयर मार्केट में पैसा लगाने पर दिक्कते आएंगी। मार्जिन कलेक्शन का यह तरीका मुश्किल साबित होगा। इतना ही नहीं ANMI ने डिलिवरी के बेचने पर मार्जिन को लेकर भी जताई चिंता जताई है। डिलिवरी वाले शेयरों पर कोई मार्जिन नहीं होनी चाहिए। 5 लाख रुपए तक के सौदों पर कोई मार्जिन ना हो।

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Share Market: डिफॉल्टर ब्रोकर से सतर्क! जानिए SEBI का नया नियम…

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2018 से अब तक 34 ब्रोकर डिफॉल्टर घोषित हो चुके हैं. इस साल अब तक 3 ब्रोकर डिफॉल्टर हुए हैं. इसलिए जब भी आप निवेश के लिए ब्रोकर का चयन करें तो सोच समझ कर ही करें. SEBI कुछ नए नियम लेकर आया है जो 2 मई से लागू होगा. जानिए आप भी नियम…

  • इंट्राडे लीवरेज पर प्रतिबंध – पहले, मार्जिन केवल दिन के अंत में सत्यापित किया जाता था. ब्रोकरों ने इसका फायदा उठाकर ग्राहकों को इंट्राडे ट्रेडों के लिए बड़े पैमाने पर लाभ उठाने की अनुमति दी, जिसे वे दिन के अंत से पहले बंद कर देंगे. सेबी ने पीक मार्जिन की अवधारणा पेश की, जिसके तहत ब्रोकरों को पूरे दिन पर्याप्त मार्जिन बनाए रखना पड़ता है.
  • शेयर गिरवी रखना – यदि कोई ग्राहक मार्जिन प्राप्त करने के लिए अपने शेयरों को गिरवी रखना चाहता है, तो उन पर ग्रहणाधिकार ग्राहक के डीमेट खाते में अंकित हो जाता है. ब्रोकरों को शेयरों को संभालने की सुविधा नहीं है, जिसका अर्थ है कि वे उनका दुरुपयोग नहीं कर सकते हैं
  • क्लाइंट्स के फंड लौटाएं – यदि किसी ग्राहक ने एक महीने में एक भी व्यापार नहीं किया है, तो ब्रोकर के पास पड़े धन को एक महीने के भीतर ग्राहक को वापस करना होगा. यहां तक कि उन लोगों के मामले में जो नियमित रूप से व्यापार करते हैं, ब्रोकर के पास पड़े अतिरिक्त धन को हर तीन महीने में एक बार वापस करना होगा.

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, SEBI के नए नियम के तहत 2 मई से ब्रोकरों को CCIL की बेवसाइट पर एक फाइल अपलोड करनी होगी. जिसमें प्रत्येक ग्राहक को दी जाने वाली सीमा का ब्रेक-अप देना होगा. इस जानकारी के आधार पर CCIL यह सुनिश्चित करेगा कि कोई ग्राहक अपनी व्यक्तिगत सीमा से अधिक पोजीशन न लें. मतलब इसका सीधा सा अर्थ है कि “इन मानदंडों की शुरूआत का मतलब यह होगा कि कोई ग्राहक दूसरे ग्राहकों की सीमा का उपयोग करके उसके द्वारा जमा किए गए मार्जिन से अधिक की पोजीशन नहीं ले सकेगा.” निवेश के पहले इन बातों का रखे सेबी के नए मार्जिन नियम ध्यान –

  • ब्रोकर के साथ खाता खोलने से पहले ऑनलाइन रिव्यू जरूर पढ़ें. एक्सचेंजों की वेबसाइटों पर ब्रोकर के खिलाफ शिकायतों की जांच करें. यदि आपको भुगतान में देरी, धन के गलत प्रबंधन, या अनधिकृत ट्रेडों से संबंधित शिकायतें मिलती हैं, तो उस ब्रोकर से बचें. हाई लीवरेज के वादे के साथ ग्राहकों को लुभाने की कोशिश करने वाले किसी भी ब्रोकर से बचना चाहिए.
  • वर्तमान में ग्राहकों की व्यक्तिगत सीमा तय करना ब्रोकर के हाथ में है. ब्रोकर चाहे तो ग्राहकों के एक समूह से संबंधित धन का उपयोग दूसरों के लेन-देन के लिए कर सकता है.
  • अकसर ब्रोकर्स अपना ब्रोकिंग चार्ज फिक्स्ड ही रखते हैं. हालांकि, ये कारोबार के वॉल्यूम और फ्रीक्वेंसी पर भी निर्भर करते हैं. ऐसे में इस बारे में बात कर लेना भी जरूरी है.
  • कुछ ब्रोकरेज हाउस सिर्फ इक्विटी ब्रोकिंग की सेवा ही नहीं प्रदान करतें, बल्कि कई प्रकार की अन्य सेवाएं भी आप तक पहुंचाते हैं. ऐसे में जान लें कि यह सेवाएं क्या हैं और आपके लिए इनकी क्या उपयोगिता है. इसके बाद ही ब्रोकर का चयन करें.
  • रेगुलेटर द्वारा यह एक बड़ा कदम जो क्लाइंट मार्जिन के अलगाव और आवंटन से जुड़ा है. जो 2 मई से प्रभावी होगा.
  • अब फ्लोटिंग नेट वर्थ की अवधारणा पेश की गई है. ब्रोकरों को न्यूनतम नेट वर्थ के अलावा फ्लोटिंग नेट वर्थ भी मेंटेन करना होगा. मान लीजिए की एक ब्रोकर का एवरेज कैश बैलेंस 10,000 करोड़ रुपये है, उसे अब 1,000 करोड़ रुपये का नेट वर्थ बनाए रखना होगा. ब्रोकरों को फरवरी 2023 तक इस मानदंड का पालन करना होगा.

ब्रोकिंग उद्योग के सूत्रों के मुताबिक ये डिफॉल्ट ज्यादातर ब्रोकरों द्वारा क्लाइंट सिक्योरिटीज और फंड के दुरुपयोग का परिणाम है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने इस तरह की प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए कड़े मानदंडों की शुरुआत की है. जिसके बाद ये ब्रोकर उसकी अनुपालन नहीं कर सके और डिफॉल्टर हो गए.

SEBI का पीक मार्जिन नियम आज से लागू, जानिए आपके लिए इसमें क्या है

SEBI के मुताबिक, Peak Margin रूल को 4 चरणों में लागू किया जाना था. 1 जून से तीसरे चरण में ट्रेडर्स के लिए 75% पीक मार्जिन ब्रोकर के पास रखना जरूरी हो गया है.

  • Harsh Chauhan
  • Updated On - June 1, 2021 / 01:08 PM IST

SEBI का पीक मार्जिन नियम आज से लागू, जानिए आपके लिए इसमें क्या है

आज से यानी 1 जून 2021 से ट्रेडर्स को ब्रोकर्स के पास 75% पीक मार्जिन (Peak Margin) रखना जरूरी कर दिया गया है. इसका मतलब है कि इक्विटी कैश और F&O इंट्राडे के लिए इंट्राडे लीवरेज अब से 1.33 गुना होगा.

निवेशकों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने जुलाई 2020 में पीक मार्जिन (Peak Margin) रूल नोटिफाई किए थे.

पीक मार्जिन (Peak Margin) के पीछे तर्क ये था कि ट्रेडिंग, इनवेस्टमेंट, ब्रोकर्स फंडिंग या लीवरेज पोजिशंस या इंट्राडे पोजिशंस लेने में कुछ अनुशासन कायम रखा जाए.

SEBI के नोटिफिकेशन के मुताबिक, पीक मार्जिन (Peak Margin) रूल को चार चरणों में लागू किया जाना था.

दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच ट्रेडर्स को कम से कम 25% पीक (अधिकतम) मार्जिन कायम रखना था. दूसरे चरण में मार्च 2021 से मई 2021 के बीच इस मार्जिन को बढ़ाकर 50% कर दिया गया था.

1 जून से लागू होने वाले तीसरे चरण में ट्रेडर्स के लिए 75 फीसदी पीक मार्जिन (Peak Margin) को ब्रोकर के पास रखना जरूरी कर दिया गया है.

आखिरी और चौथे चरण में यानी सितंबर 2021 तक क्लाइंट्स का दिन में ब्रोकर्स के पास 100 फीसदी पीक मार्जिन होना जरूरी होगा.

क्या होता है पीक मार्जिन?

पहले ब्रोकर्स के रिपोर्ट किए गए मार्जिन कस्टमर के उस ट्रेडिंग दिन में किए गए कैरी-फॉरवर्ड ट्रेड के केवल दिन के अंत में होते थे.

इस वजह से ब्रोकर्स इंट्राडे (MIS), कवर सेबी के नए मार्जिन नियम ऑर्डर (CO) और ब्रैकेट ऑर्डर (BO) में ज्यादा लीवरेज मुहैया करा पाते थे.

कस्टमर्स इक्विटीज के लिए VAR (वैल्यू ऐट रिस्क) + ELM (एक्सट्रीम लॉस मार्जिन) और F&O के लिए SPAN + एक्सपोजर की तय सीमा से कम मार्जिन पर ट्रेड कर पाते थे.

लीवरेज की वजह से ब्रोकर्स के लिए जोखिम बढ़ता है और ऐसे भी मामले हुए हैं जबकि कस्टमर्स दिन के अंत में मार्जन मुहैया करा पाने में सफल नहीं रहे.

इसका आपके लिए क्या मतलब है?

पीक मार्जिन (Peak Margin) से इंडीविजुअल लेवल और मोटे तौर पर मार्केट लेवल पर रिस्क बढ़ जाता है.

मिसाल के तौर पर, अगर किसी ट्रेडर को पता है कि उसकी ट्रेड की वैल्यू के 5% बराबर रकम ब्रोकर के पास मौजूद है तो वह अपने ट्रेडिंग लॉस को ट्रेड की वैल्यू के 2-3% पर सीमित रखने में सफल हो सकता है.

दूसरी ओर, अगर अब मार्जिन को बढ़ाकर मान लीजिए 10% कर दिया जाता है तो ट्रेडर ज्यादा लॉस के लिए जोखिम ले सकता है और वह अपने लॉस को 7-8% पर समेट सकता है.

ANMI की दरख्वास्त

ब्रोकिंग इंडस्ट्री संगठन एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंजेज मेंबर्स ऑफ इंडिया (ANMI) ने रेगुलेटरी अथॉरिटीज से डे ट्रेड पीक मार्जिन (Peak Margin) पर 100 फीसदी लेवी लगाने के प्रस्ताव पर फिर से विचार करने को कहा है. SEBI को लिखी अपनी चिट्ठी में ANMI ने कहा है कि प्रस्तावित मार्जिन जो वास्तविक लेवी होनी चाहिए उसका 300% है.

1 September Rules Change : आज से लागू हो रहे हैं ये नए नियम, आपकी जेब पर डालेंगे असर, तैयार रहें

देश में 1 सितंबर से कई अहम बदलाव (New Rules Changes from 1st September) हो रहे हैं, जो जानना बेहद जरूरी हैं. इस महीने बैंकिंग और स्टॉक मार्केट सहित कई दूसरे फ्रंट पर भी कुछ बदलाव हो रहे हैं, जिनके बारे में हम आपको बता रहे हैं.

1 September Rules Change : आज से लागू हो रहे हैं ये नए नियम, आपकी जेब पर डालेंगे असर, तैयार रहें

New Rules from September : इस महीने कई पहलुओं पर हो रहे हैं नए बदलाव.

नया महीना शुरू हो चुका है और नए महीने के साथ आते हैं कई नए बदलाव. ऐसे बदलाव भी जो सीधा आपकी जेब पर असर डालते हैं. देश में 1 सितंबर से कई अहम बदलाव (New Rules Changes from 1st September) हो रहे हैं, जो आम उपभोक्ताओं से लेकर वेतनभोगियों के लिए जानना बेहद जरूरी हैं. कारोबारियों के लिए भी जीएसटी रिटर्न (GST Return) समेत कई नियम बदल रहे हैं. इस महीने बैंकिंग और स्टॉक मार्केट सहित कई दूसरे फ्रंट पर भी कुछ बदलाव हो रहे हैं, जिनके बारे में हम आपको बता रहे हैं. सबसे बड़ा बदलाव ये है कि आधार और पीएफ खाते को लिंक होना आज से अनिवार्य हो गया है. अगर आपने अब तक ईपीएफओ पोर्टल पर आधार और पीएफ अकाउंट की लिंकिंग नहीं कराई तो आप अपने पीएफ खाते से रकम नहीं निकाल पाएंगे. आपको कई अन्य सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है.

LPG सिलेंडर के बढ़ गए दाम
हर माह के अंत में तेल एवं गैस कंपनियां एलपीजी के दामों की समीक्षा करती हैं. जुलाई और अगस्त के महीनों में लगातार 25-25 रुपये की बढ़ोतरी एलपीजी सिलेंडर के दाम में हुई है. कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में वृद्धि को देखते हुए उपभोक्ताओं को सितंबर में भी झटका लग चुका है. महीने के पहले दिन से एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 25 पैसे रुपये प्रति सिलिंडर का इजाफा हो चुका है.

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आधार-यूएएन लिंकिंग अनिवार्य

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने कहा है कि 1 सितंबर से पीएफ की राशि उन्हीं कर्मचारियों के खाते में भेजी जाएगी, जिनका आधार नंबर और पीएफ का यूनीवर्सल अकाउंट नंबर (Universal Account Number) से लिंक हुआ होगा. ईपीएफओ ने कहा है कि यूएएन (UAN) को आधार को लिंक कराना अंशधारकों के लिए अनिवार्य है. अन्यथा पीएफ खाताधारकों को अकाउंट में पीएफ राशि हस्तांतरित होने के अलावा, एडवांस निकालने जैसी कई सुविधाओं से वंचित होना पड़ेगा. ऐसे में न तो कर्मचारियों और ना ही कंपनियों का पीएफ योगदान खाते में जाएगा.

PNB के ग्राहकों को कम मिलेगा ब्याज

पंजाब नेशनल बैंक ने अपने सेविंग्स अकाउंट की ब्याज दरों में कटौती करने की घोषणा की थी, जो आज से लागू हो रही थी. बैंक के पुराने और नए ग्राहकों को अब उनके सेविंग्स अकाउंट पर 2.90% ही ब्याज मिलेगा. पहले यह 3% था.

शेयर बाजार में SEBI का मार्जिन पर नया नियम आज से लागू

सेबी का 100 फीसदी मार्जिन का नियम आज से लागू हो रहा है. इस नियम के तहत स्टॉक ट्रेडर्स को कैश, फ्यूचर एंड सेबी के नए मार्जिन नियम ऑप्शन्स और इंट्राडे ट्रेडिंग पर पूरा मार्जिन देना होगा. मार्जिन घटने पर जुर्माना देना होगा.

जीएसटी आर-1

जिन कारोबारियों ने पिछले दो महीनों में जीएसटीआर-3बी रिटर्न दाखिल नहीं किया है, वे एक सितंबर से बाहर भेजी जाने वाली आपूर्ति का ब्यौरा जीएसटीआर-1 में नहीं भर पायेंगे. केंद्रीय जीएसटी नियमों के तहत नियम-59 (6), एक सितंबर 2021 से अमल में आ जायेगा.यह नियम जीएसटीआर -1 दाखिल करने में प्रतिबंध का प्रावधान करता है.

नए वाहनों के लिए बंपर टू बंपर इंश्योरेंस

देश में 1 सितंबर जो भी नया वाहन बेचा जाएगा, उस पर बंपर टू बंपर इंश्योरेंस (Bumper to Bumper Insurance) अनिवार्य होगा. मद्रास हाईकोर्ट ने इस बाबत एक सेबी के नए मार्जिन नियम आदेश पारित किया है. यह ड्राइवर, यात्री और वाहन मालिक का 5 साल का बीमा अनिवार्य होने के अतिरिक्त होगा. इससे वाहन बीमा (Vehicle Insurance) क्षेत्र में सेबी के नए मार्जिन नियम बड़ा बदलाव आ सकता है.

SBI ने पैन लिंक किया अनिवार्य

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ग्राहक (SBI customers) बड़ी राशि के लेनदेन में दिक्कत आ सकती सेबी के नए मार्जिन नियम है, अगर वो अपने आधार को पैन से लिंक नहीं कराते हैं. SBI ने अपने ग्राहकों से कहा है कि हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए आधार और पैन को लिंक (Aadhaar PAN Link Last Date) कराना आवश्यक होगा. हालांकि अब इसकी समयसीमा 30 सितंबर तक स्टेट बैंक ने बढ़ा दी है.ऐसे में अगर आप 50 हजार या उससे ज्यादा राशि के लेनदेन एसबीआई खाते से करते हैं तो बिना लिंकिंग के ये संभव नहीं हो पाएगा.

चेक से बड़े लेनदेन पर रखें ये ध्यान

रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ी राशि के चेक के लेनदेन के लिए पॉजिटिव पे सिस्टम (Positive Pay System) सभी बैंकों से लागू करने को कहा है. इसके तहत 50 हजार या उससे अधिक का चेक आप दे रहे हैं तो इसकी जानकारी अपने बैंक को नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग या फिर बैंक शाखा जाकर देनी होगी. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो चेक रिजेक्ट (Cheque Clearance) किया जा सकता है. एसबीआई समेत कई सरकारी बैंकों ने इसके लिए न्यूनतम 50 हजार रुपये की सीमा रखी है. जबकि कई निजी बैंकों में इसके लिए न्यूनतम राशि ज्यादा है. इससे बैंक धोखाधड़ी या गैरकानूनी लेनदेन से बचा जा सकेगा. कई बैंक ये नियम पहले ही लागू कर चुके हैं. एक्सिस बैंक आज से ये नियम लागू कर रहा है.

सेबी के नए मार्जिन नियम

सेबी ने बदले मार्जिन के नियम, अब नए शेयर खरीदने के दो दिन पहले करना पड़ेगा ये काम

सेबी ने बदले मार्जिन के नियम, अब नए शेयर खरीदने के दो दिन पहले करना पड़ेगा ये काम

नई दिल्ली। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने मार्जिन के नियमों में बड़े बदलाव किये है। ये नए नियम 1 अगस्त से लागू होने जा रहे है। नए नियमों के मुताबिक अब कैश सेग्मेंट में भी अपफ्रंट मार्जिन लगेगा। अब कैश सेग्मेंट में कम से कम 22 फीसदी मार्जिन देना होगा। साथ ही T+2 सेटलमेंट के बाद ही पैसे का इस्तेमाल हो सकेगा।

ऐसे में अगर सोमवार को शेयर बेचा है तो बुधवार को ही नया सौदा कर सकेंगे। इसका BTST या STBT के वॉल्यूम पर असर पड़ सकता है। अब होल्डिंग के शेयर बेचने हैं तो भी मार्जिन लगेगा NSE,BSE ने शनिवार को इस पर FAQ जारी किया है। मार्जिन के नए नियम चरणों में लागू होंगे।

ब्रोकर्स का कहना है कि इससे मार्जिन कलेक्शन के तरीके की मुश्किलें बढ़ जाएंगीं। नए नियम से डिलीवरी के बेचने पर मार्जिन को लेकर जताई चिंता जताई जा रही है। डिलीवरी वाले शेयरों पर कोई मार्जिन नहीं होना चाहिए।

जानकारों का भी कहना है कि NSE-BSE को ब्रोकर्स, ट्रेडर्स की मुश्किल समझनी चाहिए। मार्जिन के नए नियमों पर राहत मिलनी चाहिए। नए नियमों से कैश में वॉल्यूम पर असर पड़ सकता है। कोरोना के कारण छोटे ट्रेडर्स और ब्रोकर पहले से ही परेशान हैं। इससे पहले सेबी ने मार्च में बाजार में उथल-पुथल पर लगाम लगाने, व्यवस्थित व्यापार और निपटान का काम ठीक कराने लिए नए नियम बनाए थे।

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