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सेबी ने सरकारी स्वामित्व वाली इस कंपनी को घोषित किया ‘नॉट फिट एंड प्रोपर’, गैर-कानूनी ट्रेडिंग का लगाया आरोप

सेबी ने सरकारी स्वामित्व वाली इस कंपनी को घोषित किया ‘नॉट फिट एंड प्रोपर’, गैर-कानूनी ट्रेडिंग का लगाया आरोप

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने पहली बार एक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी को ‘नॉट फिट एंड कानूनी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स प्रोपर’ घोषित किया है. PEC लिमिटेड, जो 100 फीसदी सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी है, उसे 2010 और 2013 के बीच ब्रोकर के तौर पर काम करने और NSEL के स्पॉट एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर गैर-कानूनी ट्रेड करने के लिए ‘नॉट फिट एंड प्रोपर’ घोषित किया गया है.

मामले पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

हिंदू बिजनेस लाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उसने 8 अक्टूबर को जारी आदेश की एक कॉपी को रिव्यू किया है. जानकारों का कहना है कि यह आदेश एक टेस्ट केस बन सकता है क्योंकि इसमें भारत के राष्ट्रपति को ‘नॉट फिट एंड प्रोपर’ के तौर पर टैग किया जा सकता है, जिनके अंदर सभी सरकारी ऑनरशिप होती है. ऐसा निजी इकाइयों के खिलाफ लिए गए समान एक्शन को देखते हुए कहा जा रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, कानूनी एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह अदालतों में निपटा हुआ सवाल है कि कंपनी अपने आप बेईमान नहीं हो सकती है. वह अपने आप किसी गैरकानूनी काम में शामिल नहीं हो सकती या कोई बुरी प्रतिष्ठा लेकर नहीं चल सकती है, क्योंकि इसके पीछे मुख्य मैनेजमेंट या बोर्ड की जिम्मेदारी हो सकती है, जिसे देखने की जरूरत है.

जानकारों के मुताबिक, एक 100 फीसदी सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी के रजिस्ट्रेशन को रद्द करने से सरकार के नॉमिनी के संचालन पर सवाल उठता है, जो कंपनी को मैनेज कर रहे थे. इससे पहले जब भी सेबी ने इकाइयों को हाईप्रोफाइल मामलों में नॉट फिट एंड प्रोपर घोषित किया है, जिसमें सहारा इंडिया एंड फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज (63 मून्स टेक्नोलॉजीज) शामिल हैं, उस समय रेगुलेटर ने उसके मैनेजमेंट, बोर्ड और प्रमोटर्स की भूमिका को स्टडी किया था.

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डेली न्यूज़

सन्दर्भ

केंद्र सरकार वर्ष 2003 के पुराने आदर्श कानून की जगह नया आदर्श मंडी कानून ला रही है, जिसके कानूनी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स प्रावधानों के माध्यम से सरकार कृषि उपज विपणन समिति (Agricultural Produce Market Committees-APMC) कानून में भारी बदलाव लाने की तैयारी में है।

प्रमुख बिंदु

  • नए आदर्श मंडी कानून में अधिसूचित बाजार क्षेत्र की अवधारणा को समाप्त करने और निजी मंडियों, किसान-उपभोक्ता बाजारों, इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की स्थापना को बढ़ावा देने का प्रावधान है।
  • साथ ही, वेयरहाउसों को छोटी मंडियों में बदला जाएगा ताकि किसानों को बेहतर सुविधाएँ और दाम मिल सके।
  • इसमें सभी व्यापारियों को राज्य के भीतर कानूनी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स सभी तरह के कृषि बाजारों में कारोबार करने के लिए एकल लाइसेंस देने की वकालत की गई है।
  • इसके अंतर्गत व्यापारी कुछ फीस देकर मंडियों, छोटी मंडियों, निजी मंडियों और ई-ट्रेडिंग प्लेटफार्म पर कारोबार कर सकते हैं।
  • प्रस्तावित कानून में इलेक्ट्रॉनिक नैशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ई-नाम) जैसे ई-ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए एकल राष्ट्रव्यापी लाइसेंस का प्रावधान है।
  • ध्यातव्य है कि सभी मौजूदा कारोबारी लाइसेंसों को कानून लागू होने के छह महीने के भीतर अंतरराज्यीय या राज्य के भीतर कारोबार के लिए एकल लाइसेंस में बदला जाएगा।
  • नए आदर्श कानून के मुताबिक सभी अधिसूचित कृषि जिंसों को मंडियों में और बाहर बेचा जा सकता है।
  • इसके अतिरिक्त कृषि उपज प्रसंस्करण कंपनी, वालमार्ट और बिग बाजार जैसी खुदरा श्रंखलाएं, इनसे जुड़े किसान सहकारी संघ और किसान-उत्पादक कंपनियाँ सीधे किसानों और उत्पादकों से कृषि उत्पाद खरीद सकती हैं।
  • वे एक कानूनी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स कानूनी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स लाइसेंस लेकर किसी मंडी या निजी बाजार की सीमा के बाहर ऐसा कर सकती हैं।
  • खरीददार अर्थात बड़ी खुदरा श्रंखलाएँ या प्रसंस्करण कंपनी , संग्रह या एकत्रीकरण केंद्र खोल सकती हैं लेकिन उन्हें सरकार को अपनी मासिक रिपोर्ट, खाता और दूसरी जानकारियाँ उपलब्ध करानी कानूनी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स होंगी।
  • बड़ी मात्रा में खरीद करने वाली कंपनियों पर आवश्यक वस्तु कानून के तहत भंडारण सीमा का नियम लागू नहीं होगा और उन्हें लाइसेंस फीस की 0.5 फीसदी राशि मार्केटिंग डेवलपमेंट फंड में देनी होगी।
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